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भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2024-25 : RBI

Wed 31 Dec, 2025

संदर्भ :

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने वर्ष 2024-25 के लिए भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति पर रिपोर्ट जारी की।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • रिपोर्ट बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 36(2) के तहत अनिवार्य है और वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल 2024 से मार्च 2025) तथा 2025-26 के पहले छमाही के प्रदर्शन का विश्लेषण करती है।
  • रिपोर्ट भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती, लचीलापन (resilience) और चुनौतियों पर जोर देती है।
  • कुल मिलाकर, यह दशकों में सबसे कम NPA स्तर, मजबूत लाभप्रदता और डिजिटल समावेशन की प्रगति को रेखांकित करती है, लेकिन डिजिटलीकरण से जुड़े फ्रॉड जोखिमों की चेतावनी भी देती है।
  • रिपोर्ट में मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और ठोस लाभ के कारण बैंकिंग क्षेत्र की निरंतर मजबूती पर प्रकाश डाला गया है

बैलेंस शीट वृद्धि और स्थिरता:

  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) की समेकित बैलेंस शीट 2024-25 में 11.2% की दर से बढ़ी (पिछले वर्ष 15.5% से कम), जो ₹312.2 लाख करोड़ तक पहुंची
  • जमा वृद्धि: 11.1% (डबल डिजिट, लेकिन पिछले वर्ष से धीमी)
  • क्रेडिट वृद्धि: 11.5%
  • विश्लेषण: वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद डबल-डिजिट वृद्धि बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती दर्शाती है। जमा और क्रेडिट का संतुलित विकास जनता के औपचारिक बैंकिंग पर बढ़ते विश्वास को दिखाता है, भले ही इक्विटी मार्केट जैसे विकल्प उपलब्ध हों।

एसेट क्वालिटी में सुधार (NPA में ऐतिहासिक गिरावट):

  • ग्रॉस NPA अनुपात मार्च 2025 तक 2.2% और सितंबर 2025 तक 2.1% तक गिरा – यह बहु-दशक (multi-decadal) का सबसे निचला स्तर है।
  • विश्लेषण: लगातार सुधार (पिछले वर्षों से जारी) बैंकिंग सुधारों, बेहतर रिकवरी और RBI की सख्त निगरानी का परिणाम है। इससे बैंक जोखिम कम हुआ और पूंजी उपलब्धता बढ़ी।

लाभप्रदता (Profitability):

  • Return on Assets (RoA): 1.4% (2024-25 में), 2025-26 के पहले छमाही में 1.3%
  • Return on Equity (RoE): 13.5% (2024-25 में), बाद में 12.5%
  • विश्लेषण: सातवीं लगातार वर्ष में लाभ वृद्धि, हालांकि फंडिंग और ऑपरेटिंग लागत बढ़ने से गति धीमी। मजबूत लाभप्रदता बैंकिंग क्षेत्र की कमाई क्षमता और पूंजी बफर्स को मजबूत करती है

पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) :

  • बैंकों के पास जोखिम से निपटने के लिए पर्याप्त पूंजी बफर है। पूंजी-जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (CRAR) मार्च 2025 में 17.4% रहा, जो विनियामक आवश्यकता (11.5%) से कहीं अधिक है।

प्रमुख चिंताएं और चुनौतियां (Flagged Risks):

  • बैंक धोखाधड़ी (Frauds): रिपोर्ट के अनुसार, धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में तो कमी आई है (36,052 से घटकर 23,879), लेकिन धोखाधड़ी की राशि (Amount Involved) में भारी उछाल आया है। यह ₹11,261 करोड़ से बढ़कर ₹34,771 करोड़ हो गई है।
  • डिजिटल जोखिम: तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ साइबर जोखिम और तकनीकी विफलताओं के प्रति बैंकों को और अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
  • ग्राहक शिकायतें: ऋण, क्रेडिट कार्ड और डिजिटल बैंकिंग से जुड़ी शिकायतों में वृद्धि देखी गई है।

NBFC और अन्य संस्थाएं:

  • NBFC की बैलेंस शीट: 18.9% वृद्धि, ₹61.09 लाख करोड़ तक।
  • डबल-डिजिट क्रेडिट वृद्धि, बेहतर एसेट क्वालिटी।
  • माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में कुछ तनाव (GNPA बढ़ा)।
  • शहरी सहकारी बैंक: पिछले वर्ष से अधिक वृद्धि।
  • विश्लेषण: NBFC बैंकिंग को पूरक बन रहे हैं, लेकिन माइक्रोफाइनेंस में रिकवरी चुनौतियां चिंता का विषय

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