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अफ्रीका में महाद्वीपीय विभाजन की संभावना

Mon 08 Dec, 2025

संदर्भ :

  • शोधकर्ताओं के अनुसार, अफ्रीकी महाद्वीप एक भूवैज्ञानिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, यह परिवर्तन महाद्वीप को दो मुख्य हिस्सों में बाँट सकता है और आगामी 5–10 मिलियन वर्षों में एक नया महासागरीय बेसिन (New Ocean Basin) बनने की संभावना है।

विभाजन की प्रक्रिया और दिशा :

  • यह विभाजन महाद्वीप के उत्तरी-पूर्व से दक्षिण की ओर हो रहा है, जिसे वैज्ञानिक “जैकेट का ज़िप” (zip on a jacket) जैसी गति के रूप में वर्णित करते हैं।
  • प्रक्रिया के दौरान ज्वालामुखीय और भूकंपीय गतिविधियाँ तीव्र होती हैं।
  • विभाजन पूरी होने पर अफ्रीका दो अलग-अलग भूभागों में बदल जाएगा:
  • पश्चिमी हिस्सा: मिस्र, अल्जीरिया, नाइजीरिया, घाना, नामीबिया जैसे प्रमुख देश शामिल होंगे।
  • पूर्वी हिस्सा: सोमालिया, केन्या, तंज़ानिया, मोज़ाम्बिक और इथियोपिया का एक बड़ा हिस्सा शामिल होगा

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अध्ययन :

  • नई चुंबकीय जानकारी (Magnetic Data): पुराने डेटा को आधुनिक तकनीकों से पुनः विश्लेषण करने पर यह पता चला कि पृथ्वी की क्रस्ट में धीरे-धीरे और लगातार खिंचाव (Rifting) हो रहा है।
  • तीन प्रमुख रिफ्ट सिस्टम: अफ़ार क्षेत्र (Red Sea, Gulf of Aden, Main Ethiopian Rift) में तीन रिफ्ट्स मिलते हैं, जिन्हें Triple Junction कहा जाता है। यह क्षेत्र महाद्वीपीय विभाजन के शुरुआती और सबसे स्पष्ट संकेत दिखाता है।
  • भूवैज्ञानिक प्रमाण: पुराने चुंबकीय डेटा से यह पुष्टि होती है कि अफ्रीका और अरब के बीच पहले भी सागर तल फैलाव (Seafloor Spreading) हुआ था।

प्रमुख भूवैज्ञानिक स्थल :

  • East African Rift: लगभग 4,000 मील लंबा फाल्ट ज़ोन (Tectonic Fissure) जो ईस्ट अफ्रीका से होकर मोज़ाम्बिक तक जाता है।
  • महत्त्वपूर्ण झीलें: Lake Malawi, Lake Turkana इस खिंचाव की प्रक्रिया से प्रभावित होंगी।

भूवैज्ञानिक सिद्धांत का आधार :

  • यह पूरी प्रक्रिया Plate Tectonics सिद्धांत पर आधारित है।
  • पृथ्वी के महाद्वीप हमेशा स्थिर नहीं रहे हैं; करोड़ों वर्षों में प्लेट्स टूटते और अलग होते रहे हैं।
  • नया महासागरीय बेसिन बनने की प्रक्रिया Seafloor Spreading द्वारा पूरी होगी।

वैज्ञानिक महत्व :

  • अफ़ार क्षेत्र का अध्ययन महाद्वीपीय विभाजन की प्रारंभिक अवस्था को समझने में महत्वपूर्ण है।
  • चुंबकीय डेटा से भूवैज्ञानिक इतिहास और भविष्य में महासागरों के निर्माण की जानकारी मिलती है।
  • यह अध्ययन पृथ्वी की सतत गतिशीलता और उसके भू-गर्भीय परिवर्तनों की दृष्टि को उजागर करता है।

महाद्वीपीय विखंडन की प्रक्रिया :

  • वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें धीरे-धीरे खिंचती और अलग होती हैं, जिससे एक महाद्वीप टूटकर नए महासागर बेसिन (समुद्र) का निर्माण होता है, जो भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि से जुड़ा है और अंततः रिफ्ट घाटी (दरार घाटी) बनाकर नई समुद्री सतह का निर्माण करता है, जो प्लेट टेक्टोनिक्स का ही एक हिस्सा है और महाद्वीपों के इतिहास का एक मूलभूत हिस्सा है।

प्रक्रिया के मुख्य चरण :

  • खिंचाव और दरार (Stretching and Rifting): मेंटल में गर्मी के कारण महाद्वीपीय क्रस्ट (पपड़ी) पर तनाव पड़ता है, जिससे वह खिंचने लगती है और कमजोर होकर फटने लगती है।
  • रिफ्ट घाटी का निर्माण (Formation of Rift Valley): जैसे-जैसे प्लेटें दूर जाती हैं, एक लंबी और संकरी घाटी (रिफ्ट) बनती है, जो अक्सर भूकंपों और ज्वालामुखीय गतिविधि से चिह्नित होती है, क्योंकि मैग्मा ऊपर उठता है।
  • समुद्री फैलाव (Oceanic Spreading): रिफ्ट घाटी चौड़ी और गहरी होती जाती है, जिससे मैग्मा का लगातार प्रवाह नए समुद्री तल का निर्माण करता है, और अंततः यह एक नया महासागर बेसिन बन जाता है (जैसे अटलांटिक महासागर का बनना)।
  • महाद्वीपीय विस्थापन (Continental Drift): अलग हुए महाद्वीपीय टुकड़े एक-दूसरे से दूर खिसकते रहते हैं, जिसे महाद्वीपीय विस्थापन कहते हैं, जो प्लेट टेक्टोनिक्स द्वारा संचालित होता है।

प्रमुख कारक :

  • प्लेट टेक्टोनिक्स (Plate Tectonics): पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गति इस प्रक्रिया का मुख्य कारण है।
  • मेंटल प्लूम्स (Mantle Plumes): कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के अंदर से उठने वाली गर्म चट्टान (मैग्मा) की धाराएँ (प्लूम्स) भी विखंडन को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • ज्वालामुखी और भूकंप (Volcanoes & Earthquakes): ये विखंडन के दौरान होने वाली महत्वपूर्ण भूगर्भीय गतिविधियाँ हैं, जो नए भू-आकृतियों को जन्म देती हैं।

उदाहरण (Example):

  • पेंजिया का टूटना (Breakup of Pangea): प्राचीन महाद्वीप पेंजिया का लॉरेशिया और गोंडवानालैंड में टूटना, और फिर इन खंडों का वर्तमान महाद्वीपों में बदलना, महाद्वीपीय विखंडन का एक बड़ा उदाहरण है।

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