संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) की 30वीं कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) सम्‍मेलन
 
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संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) की 30वीं कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) सम्‍मेलन

Fri 28 Nov, 2025

संदर्भ :

  • 30वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP 30) का आयोजन 10 से 21 नवंबर 2025 तक ब्राजील के बेलेम में हंगर कन्वेंशन सेंटर में किया गया, जो अमेज़न क्षेत्र में पहली बार हुआ।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • आयोजन स्थल : बेलेम, ब्राज़ील (अमेज़न क्षेत्र में)
  • मेजबान : ब्राजील, 1992 के रियो अर्थ समिट के बाद पहली बार लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में COP का आयोजन था
  • अवधि : 10 से 22 नवंबर 2025
  • यह स्थान प्रतीकात्मक था, क्योंकि अमेज़न जैव विविधता का केंद्र है और जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक
  • उद्देश्य : पेरिस समझौते के 1.5°C तापमान वृद्धि सीमा को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाना था, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों (जैसे अमेरिका के ट्रंप प्रशासन का प्रभाव), विकासशील देशों की वित्तीय मांगों और जीवाश्म ईंधन उत्पादक देशों के विरोध के कारण यह आंशिक सफलता ही हासिल कर सका
  • स्थान का महत्व: बेलेम अमेज़न के द्वार पर स्थित है, जो वैश्विक कार्बन सिंक (कार्बन अवशोषक) के रूप में कार्य करता है। हालांकि, आयोजन से पहले अमेज़न में 8 मील लंबी चार-लेन वाली "फ्रीडम हाईवे" का निर्माण हुआ, जिससे 1 लाख पेड़ कटे, जिसकी आलोचना पर्यावरणविदों ने की
  • भागीदारी: लगभग 200 देशों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और नागरिक समाज शामिल हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अनुपस्थिति और उनके जलवायु संशय ने वार्ताओं को प्रभावित किया। यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी NDC (राष्ट्रीय निर्धारित योगदान) प्रस्तुत की, जिसमें 2035 तक 1990 स्तर से 66.25-72.5% उत्सर्जन में कमी का लक्ष्य है।

मुख्य एजेंडा और प्रमुख मुद्दे :

  • COP30 का एजेंडा छह स्तंभों पर आधारित था: ऊर्जा, उद्योग और परिवहन; वन, महासागर और जैव विविधता; कृषि और खाद्य प्रणाली; शहर, बुनियादी ढांचा और जल; मानव और सामाजिक विकास; तथा क्रॉस-कटिंग मुद्दे (जैसे वित्त और न्याय)।
  • यह पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ पर केंद्रित था, जहां फोकस NDC की समीक्षा, COP29 के वित्तीय वादों की प्रगति और 1.5°C लक्ष्य पर था।

प्रमुख परिणाम और उपलब्धियां :

  • सम्मेलन 22 नवंबर को समाप्त हुआ, जिसमें "बेलेम पॉलिटिकल पैकेज" नामक निर्णय लिया गया।

सकारात्मक परिणाम:

  • 2035 तक विकासशील देशों को हर साल $1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का कुल जलवायु वित्त उपलब्ध कराने का आह्वान किया गया है। इस कुल राशि में से, एक नया, तिगुना लक्ष्य $300 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है, जो पिछले $100 बिलियन के लक्ष्य से तीन गुना है।
  • NDC में प्रगति: कुछ देशों (जैसे EU) ने महत्वाकांक्षी NDC जमा कीं, लेकिन वैश्विक गैप बड़ा है—वर्तमान योजनाएं 1.5°C लक्ष्य से 20-30 GtCO2e दूर हैं।
  • वन संरक्षण: "ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी" (TFFF) लॉन्च, जो अमेज़न संरक्षण के लिए फंडिंग बढ़ाएगा। "मामिराऊा घोषणा" में 30 संगठनों ने जैव विविधता ट्रैकिंग के लिए एकीकृत फ्रेमवर्क पर सहमति जताई।
  • साइड डील्स: ब्राजील ने 80+ देशों के साथ जीवाश्म ईंधन रोडमैप की स्वैच्छिक पहल शुरू की। न्यायपूर्ण संक्रमण वर्क प्रोग्राम को आगे बढ़ाया गया।

नकारात्मक परिणाम:

  • जीवाश्म ईंधन पर असफलता: अंतिम दस्तावेज में "फॉसिल फ्यूल" शब्द ही नहीं आया। सऊदी अरब जैसे उत्पादक देशों ने बाध्यकारी भाषा रोकी। EU, कोलंबिया, पनामा और स्विट्जरलैंड ने विरोध किया, जिससे सत्र रुका।
  • वित्तीय गैप: $120 अरब/वर्ष का वादा किया गया, लेकिन जरूरत $360 अरब/वर्ष है। CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) पर निर्णय टला।
  • अनुकूलन इंडिकेटर्स: कमजोर सेट अपनाया गया, जिसकी आलोचना हुई।

भविष्य की दिशा और सिफारिशें :

  • तुर्की COP31 की मेजबानी करेगा और ऑस्ट्रेलिया इसकी अध्यक्षता करेगा
  • इथियोपिया 2027 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP32) की मेजबानी करेगा।

 

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC)

  • पूर्ण नाम : यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज
  • स्थापना/अंगीकरण : 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) में अंगीकृत किया गया
  • लागू हुआ : 21 मार्च 1994
  • सचिवालय : बॉन, जर्मनी
  • सदस्यता : लगभग 198 पक्षकार

मुख्य दस्तावेज/समझौते :

  • UNFCCC (1992) – मूल संधि
  • क्योटो प्रोटोकॉल (1997, 2005 से लागू, 2020 तक)
  • पेरिस समझौता (2015, 2016 से लागू) – वर्तमान में सक्रिय

महत्वपूर्ण तारीखें :

  • 1992 – रियो अर्थ समिट (UNFCCC अपनाया गया)
  • 1997 – क्योटो प्रोटोकॉल
  • 2015 – पेरिस समझौता
  • 2025 – NDC 3.0 और NCQG की समय-सीमा

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