07 March, 2026
'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन'
Sat 04 Oct, 2025
संदर्भ :
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' को मंजूरी प्रदान की।
मिशन का अवलोकन (Mission Overview)
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| अवधि | 6 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक) |
| कुल वित्तीय परिव्यय | ₹11,440 करोड़ |
| मुख्य लक्ष्य | घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर दालों के आयात पर निर्भरता को कम करना और देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाना। |
| आवश्यकता | भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन घरेलू उत्पादन माँग के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण लगभग 15-20% दालों का आयात करना पड़ता है। |
प्रमुख लक्ष्य एवं उद्देश्य (Key Targets and Objectives)
यह मिशन 2030-31 तक निम्नलिखित लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास करेगा :
| पैरामीटर | वर्तमान स्तर (लगभग) | 2030-31 का लक्ष्य |
| कुल उत्पादन | 242 लाख टन (2023-24) | 350 लाख टन |
| खेती का क्षेत्रफल | 242 लाख हेक्टेयर | 310 लाख हेक्टेयर |
| उत्पादकता (पैदावार) | 881 किलोग्राम/हेक्टेयर | 1,130 किलोग्राम/हेक्टेयर |
| लक्षित किसान | लगभग 2 करोड़ किसानों तक पहुँचना | |
| फोकस फसलें | तूर (अरहर), उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान |
कार्यान्वयन की रणनीति (Implementation Strategy)
A. बीज प्रणाली एवं अनुसंधान (Seed System and Research) :
- उच्च गुणवत्ता वाले बीज: किसानों को 88 लाख मुफ्त बीज किट वितरित की जाएंगी ताकि वे उच्च उपज देने वाली, कीट-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु नई किस्मों को अपना सकें।
- बीज वितरण: 2030-31 तक 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जाएंगे।
- ट्रैकिंग और गुणवत्ता: बीज की गुणवत्ता और वितरण की निगरानी SATHI पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
- क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण: 416 लक्षित जिलों में क्लस्टर दृष्टिकोण अपनाकर संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
B. क्षेत्रफल विस्तार एवं विविधीकरण (Area Expansion and Diversification) :
- परती भूमि का उपयोग: चावल की कटाई के बाद छोड़ी गई परती (Rice Fallow) भूमि और अन्य विविधीकरणीय क्षेत्रों को दालों की खेती के तहत लाया जाएगा।
- अंतर-फसलीकरण (Intercropping): दालों को अन्य फसलों के साथ अंतर-फसलीकरण (जैसे मक्का/गन्ना के साथ तूर) के माध्यम से उगाकर क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा।
C. किसानों के लिए मूल्य समर्थन (Price Support for Farmers) :
- निश्चित खरीद (Assured Procurement): मिशन के तहत तूर, उड़द और मसूर की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100% सुनिश्चित की जाएगी। यह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाकर दालों की खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा।
D. कटाई उपरांत और मूल्य संवर्धन (Post-Harvest and Value Addition) :
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 नए प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, जिसके लिए प्रति यूनिट ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।
नौतियां और संभावित बाधाएं
- जलवायु परिवर्तन: अनियमित मानसून से उत्पादन प्रभावित। हालांकि, नई किस्में इसका समाधान करेंगी, लेकिन कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।
- बाजार लिंकेज: MSP खरीद के बावजूद, निजी व्यापारियों की हस्तक्षेप से किसान प्रभावित हो सकते हैं। NAFED/NCCF की क्षमता बढ़ाने की जरूरत।
- जागरूकता और प्रशिक्षण: छोटे किसानों तक पहुंच। डिजिटल पोर्टल का उपयोग सीमित ग्रामीण क्षेत्रों में।
- बजट कार्यान्वयन: 11,440 करोड़ का सही वितरण सुनिश्चित करना। पिछले NFSM में 10-15% फंड अप्रयुक्त रहते हैं।
- आयात दबाव: वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से तात्कालिक राहत मुश्किल।









