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'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन'

Sat 04 Oct, 2025

संदर्भ :

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्‍य से 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' को मंजूरी प्रदान की।

 

मिशन का अवलोकन (Mission Overview)

मुख्य बिंदु विवरण
अवधि 6 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक)
कुल वित्तीय परिव्यय ₹11,440 करोड़
मुख्य लक्ष्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर दालों के आयात पर निर्भरता को कम करना और देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाना।
आवश्यकता भारत विश्‍व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन घरेलू उत्पादन माँग के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण लगभग 15-20% दालों का आयात करना पड़ता है।

 

प्रमुख लक्ष्य एवं उद्देश्य (Key Targets and Objectives)

यह मिशन 2030-31 तक निम्नलिखित लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास करेगा :

पैरामीटर वर्तमान स्तर (लगभग) 2030-31 का लक्ष्य
कुल उत्पादन 242 लाख टन (2023-24) 350 लाख टन
खेती का क्षेत्रफल 242 लाख हेक्टेयर 310 लाख हेक्टेयर
उत्पादकता (पैदावार) 881 किलोग्राम/हेक्टेयर 1,130 किलोग्राम/हेक्टेयर
लक्षित किसान लगभग 2 करोड़ किसानों तक पहुँचना  
फोकस फसलें तूर (अरहर), उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान  

 

कार्यान्वयन की रणनीति (Implementation Strategy)

A. बीज प्रणाली एवं अनुसंधान (Seed System and Research) : 

  • उच्च गुणवत्ता वाले बीज: किसानों को 88 लाख मुफ्त बीज किट वितरित की जाएंगी ताकि वे उच्च उपज देने वाली, कीट-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु नई किस्मों को अपना सकें।
  • बीज वितरण: 2030-31 तक 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जाएंगे।
  • ट्रैकिंग और गुणवत्ता: बीज की गुणवत्ता और वितरण की निगरानी SATHI पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
  • क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण: 416 लक्षित जिलों में क्लस्टर दृष्टिकोण अपनाकर संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

B. क्षेत्रफल विस्तार एवं विविधीकरण (Area Expansion and Diversification) : 

  • परती भूमि का उपयोग: चावल की कटाई के बाद छोड़ी गई परती (Rice Fallow) भूमि और अन्य विविधीकरणीय क्षेत्रों को दालों की खेती के तहत लाया जाएगा।
  • अंतर-फसलीकरण (Intercropping): दालों को अन्य फसलों के साथ अंतर-फसलीकरण (जैसे मक्का/गन्ना के साथ तूर) के माध्यम से उगाकर क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा।

C. किसानों के लिए मूल्य समर्थन (Price Support for Farmers) : 

  • निश्चित खरीद (Assured Procurement): मिशन के तहत तूर, उड़द और मसूर की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100% सुनिश्चित की जाएगी। यह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाकर दालों की खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा।

D. कटाई उपरांत और मूल्य संवर्धन (Post-Harvest and Value Addition) : 

  • इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 नए प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, जिसके लिए प्रति यूनिट ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।

 

नौतियां और संभावित बाधाएं

  • जलवायु परिवर्तन: अनियमित मानसून से उत्पादन प्रभावित। हालांकि, नई किस्में इसका समाधान करेंगी, लेकिन कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।
  • बाजार लिंकेज: MSP खरीद के बावजूद, निजी व्यापारियों की हस्तक्षेप से किसान प्रभावित हो सकते हैं। NAFED/NCCF की क्षमता बढ़ाने की जरूरत।
  • जागरूकता और प्रशिक्षण: छोटे किसानों तक पहुंच। डिजिटल पोर्टल का उपयोग सीमित ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • बजट कार्यान्वयन: 11,440 करोड़ का सही वितरण सुनिश्चित करना। पिछले NFSM में 10-15% फंड अप्रयुक्त रहते हैं।
  • आयात दबाव: वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से तात्कालिक राहत मुश्किल।

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