01 September, 2025
सहायक कोचिंग (Shadow Schooling)
Sat 30 Aug, 2025
संदर्भ
Shadow Schooling’ भारत में एक बढ़ता व्यवहार बनता जा रहा है—जहाँ औपचारिक विद्यालयी शिक्षा में हिस्सेदारी और गुणवत्ता में कमी के कारण निजी कोचिंग में निर्भरता बढ़ी है। यह स्थिति शिक्षा में असमानता, वित्तीय बोझ और तनाव बढ़ाने वाली चुनौती बन चुकी है।
क्या है 'Shadow Schooling'?
- 'Shadow Schooling' वह प्रणाली है जहाँ छात्र सामान्य विद्यालयीन शिक्षण के अलावा निजी कोचिंग या ट्यूशन लेते हैं। इसे 'shadow' कहा जाता है क्योंकि यह स्कूल के विषयों की तरह ही संरचना रखता है लेकिन निजी संस्थानों द्वारा शुल्क पर संचालित होता है।
CMS रिपोर्ट 2025 से प्रमुख तथ्य:
- राष्ट्रव्यापी औसत: लगभग 27% छात्र, 33% तक, निजी कोचिंग लेते हैं।
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- शहरी क्षेत्र: 30.7%
- ग्रामीण क्षेत्र: 25.5%
- खर्च में अंतर:
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- शहरी परिवार बताते हैं औसतन ₹3,988 प्रति वर्ष प्रति छात्र
- ग्रामीण परिवारों का खर्च: ₹1,793 प्रति वर्ष per छात्र
- उच्च माध्यमिक स्तर पर:
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- शहरी घर खर्च ≈ ₹9,950, लगभग दोगुना
- ग्रामीण: ₹4,548
- आयु के साथ खर्च बढ़ता है:
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- पूर्व प्राथमिक: ₹525
- उच्च माध्यमिक: ₹6,384
- वित्तपोषण स्रोत:
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- 95% छात्र पारिवारिक संसाधनों पर निर्भर करते हैं, केवल 1.2% सरकारी छात्रवृत्ति लाभ प्राप्त करते हैं।
सीएमएस रिपोर्ट की व्याख्या:
- प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण—मनमाफिक शिक्षा की मांग उभर रही है और माता-पिता को स्कूल की गुणवत्ता को लेकर चिन्ता है।
- शिक्षा में सुधार की आवश्यकता—स्कूलों में संसाधन, अध्यापकीय समर्थन या परीक्षा तैयारी की कमी को निजी कोचिंग के माध्यम से पूरा किया जा रहा है।
Shadow Schooling से जुड़े मुख्य प्रश्न और प्रभाव:
प्रश्न | विश्लेषण |
शैक्षणिक विषमता को बढ़ा सकता है? | हाँ—जो छात्र कोचिंग नहीं ले पाते, वे आगे पिछड़ सकते हैं। |
आर्थिक भार बढ़ता है? | हाँ—निजी कोचिंग की उच्च लागत से मध्यम या निम्न आय वाले परिवार प्रभावित होते हैं। |
शैक्षणिक तनाव बढ़ता है? | हाँ—स्कूल + कोचिंग दोनों से बच्चे पर दबाव बढ़ता है। |
नीतिगत हस्तक्षेप जरूरी? | हाँ—शैक्षिक सुधार, समावेश तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए। |
आगे की रणनीति और समाधान:
- स्कूली गुणवत्ता में सुधार: अध्यापक प्रशिक्षण, समावेशी शिक्षण और स्कूल अधोसंरचना को मजबूत करना।
- कोचिंग के प्रभावों का अध्ययन: Shadow schooling के दीर्घकालिक प्रभावों पर शोध और नीति निर्धारण।
- सामाजिक-आर्थिक समर्थन: छात्रवृत्तियों और कैरियर मार्गदर्शन से निजी कोचिंग का दबाव कम किया जा सकता है।
भारत में स्कूल शिक्षा को प्रभावी बनाने हेतु सरकारी पहल
योजना / कार्यक्रम | वर्ष आरंभ | उद्देश्य / विशेषता |
सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) | 2001 | 6–14 वर्ष के बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा सार्वभौमिक बनाना |
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) | 2009 | माध्यमिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधारना और पहुंच बढ़ाना |
समग्र शिक्षा अभियान | 2018 | SSA और RMSA को मिलाकर स्कूल शिक्षा को एकीकृत दृष्टिकोण से समेकित करना |
मध्याह्न भोजन योजना / पीएम-पोषण | 1995 | पोषण सुधार और स्कूल में उपस्थिती बढ़ाने के लिए प्रतिदिन मुफ्त भोजन प्रदान करना |
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ | 2015 | बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और उनकी सामाजिक स्थिति सुधारना |
पीएम श्री स्कूल | 2022 | श्रेष्ठ शिक्षा के आदर्श मॉडल स्कूल विकसित करना, बढ़िया अधोसंरचना और नवीन शिक्षण पद्धति प्रदान करना |