16 March, 2026
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI)
Wed 21 Aug, 2024
संदर्भ
- भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 8.5 अरब डॉलर के डिज्नी और रिलायंस विलय के बारे में चिंता जाहिर की है, कि इससे प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचेगा।
मुख्य बिंदु
- CCI की मुख्य चिंता क्रिकेट प्रसारण के विशेष अधिकारों को लेकर है।
- डिज़नी-रिलायंस के पास टीवी और स्ट्रीमिंग क्षेत्र में विज्ञापन बाज़ार का 40% हिस्सा होगा।
- CCI के अनुसार, यह विलय लाइव इवेंट के दौरान विज्ञापनदाताओं के लिए दरें बढ़ा सकती है।
- Zee और सोनी के 10 बिलियन डॉलर के विलय के खिलाफ़ 2022 में CCI द्वारा इसी तरह की चेतावनी नोटिस के कारण, Zee-सोनी विलय विफल हो गया था।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग: एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय (Quasi-Judicial Body)
- भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है। यह प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (Competition Act, 2002) के प्रवर्तन के लिये उत्तरदायी है।
- मुख्य उद्देश्य: देश में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना
CCI की स्थापना और उद्देश्य
- स्थापना: CCI की स्थापना 14 अक्टूबर 2003 को हुई थी, लेकिन 20 मई 2009 से पूरी तरह से कार्य करना शुरू हुआ।
उद्देश्य:
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: CCI का मुख्य उद्देश्य बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
- उपभोक्ताओं का हित: CCI यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ताओं को अधिक से अधिक विकल्प मिलें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और सेवाओं पर उचित मूल्य का भुगतान करना पड़े।
- अन्यायपूर्ण व्यापार प्रथाओं को रोकना: CCI उन व्यापारिक गतिविधियों पर नजर रखता है जो प्रतिस्पर्धा को कम करती हैं या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाती हैं।
- विलय और अधिग्रहण का मूल्यांकन: जब दो या दो से अधिक कंपनियां आपस में मिलती हैं, तो CCI यह जांच करता है कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कम तो नहीं होगी।
संरचना
- एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
- वर्तमान में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों के साथ कार्यरत है।
CCI के प्रमुख कार्य व अधिकार
- शिकायतों की जांच: उपभोक्ता या अन्य कंपनियां यदि किसी कंपनी के खिलाफ प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों की शिकायत करते हैं, तो CCI उसकी जांच करता है।
- विलय और अधिग्रहण का अनुमोदन: जब दो या दो से अधिक कंपनियां आपस में मिलती हैं, तो CCI को उसका अनुमोदन लेना होता है।
- जांच और छापेमारी: CCI अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की जांच के लिए कंपनियों के कार्यालयों में छापेमारी कर सकता है।
- सूचना मांगने का अधिकार: CCI किसी भी कंपनी से सूचना, दस्तावेज या रिकॉर्ड मांग सकता है। कंपनियों को CCI को यह जानकारी उपलब्ध करानी होती है।
- जुर्माना: CCI अपनी जांच के आधार पर निर्णय लेता है और दोषी कंपनियों पर जुर्माना लगा सकता है या अन्य कार्रवाई कर सकता है।
| राघवन समिति की अनुशंसा पर एकाधिकार तथा अवरोधक व्यापार व्यवहार. अधिनियम, 1969 (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act- MRTP Act) को निरस्त कर इसके स्थान पर प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 लाया गया। |









