06 August, 2026
भारत ने पहली बार 'घासभूमि और अन्य खुली प्राकृतिक पारिस्थितिकी' मार्गदर्शिका जारी की
Wed 19 Aug, 2026
संदर्भ :
- मंगोलिया के उलानबातर में आयोजित UNCCD COP-17 में भारत ने अपनी पहली 'घासभूमि और अन्य खुली प्राकृतिक पारिस्थितिकी' मार्गदर्शिका जारी की।
मुख्य बिन्दु :
- मुख्य उद्देश्य : भारत के घास के मैदानों, सवाना, मरुस्थलों और अन्य खुले प्राकृतिक इको-सिस्टम की समृद्ध विविधता, पारिस्थितिक महत्व और सामाजिक-आर्थिक महत्व को उजागर करना।
- लॉन्च की तारीख: 17 अगस्त 2026 को
- लॉन्च का स्थान: मंगोलिया की राजधानी उलानबटार
- सहयोगी संस्थान: इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के मार्गदर्शन में अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट (ATREE) ने IUCN, CoE-SLM (सतत भूमि प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र), ICFRE और ISRO के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (SAC) के सहयोग से तैयार किया है।
- पारिस्थितिक वर्गीकरण: इस गाइड में भारत के 24 पारिस्थितिकी तंत्र प्रकारों को वर्गीकृत किया गया है।
- भौगोलिक दायरा: इसमें हिमालयी और तराई के घास के मैदान, थार और बन्नी परिदृश्य, दक्कन के सवाना, चट्टानी पठार, बीहड़, झाड़ियां और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं
खुली प्राकृतिक पारिस्थितिकी (ONE) :
- ये वे प्राकृतिक परिदृश्य हैं जहां वृक्षों का घनत्व बहुत कम या न के बराबर होता है और छोटी वनस्पतियां (घास, झाड़ियां) हावी होती हैं।
- जैव विविधता का आश्रय: ये भारत की कई संकटग्रस्त और अनूठी प्रजातियों का घर हैं, जैसे—ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (सोनाचिड़िया), लेसर फ्लोरिकन, भारतीय भेड़िया, ब्लैकबक (काला हिरण), चिंकारा और कैराकल
- आजीविका और चरवाहा समुदाय : यह गाइड भारत के पारंपरिक चरवाहा समुदायों (जैसे बन्नी के मालधारी, राजस्थान/गुजरात के राइका और रबारी, महाराष्ट्र के धनगर और लद्दाख के चांगपा) और उनकी पशुधन-आधारित अर्थव्यवस्था की सुरक्षा करती है।
- कार्बन पृथक्करण : जंगलों की तरह, ये घास के मैदान भी अपनी मिट्टी में भारी मात्रा में कार्बन जमा करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन शमन में मदद करता है।
- पारंपरिक संरक्षण पद्धतियाँ: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के अजमेर के 'ओरण' और 'गौचर' जैसी सामुदायिक और पवित्र भूमियों का विशेष उल्लेख किया, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखती हैं।
UNCCD COP-17 :
- आयोजन तिथि: 17 से 28 अगस्त 2026
- मेजबान देश और शहर: उलानबातर, मंगोलिया
- मुख्य विषय/थीम : "भूमि का पुनर्स्थापन, आशा का पुनर्स्थापन"
- अध्यक्षता: मंगोलिया की विदेश मंत्री बात्सेत्सेग बात्मनख को इस सत्र का अध्यक्ष चुना गया है
- सदस्य देश: इसमें संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन (UNCCD) के 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं
'ट्रिपल कॉप' का महत्व :
- वर्ष 2026 पर्यावरण की दृष्टि से बेहद ऐतिहासिक है क्योंकि इतिहास में पहली बार रियो कन्वेंशन के तीनों महत्वपूर्ण सम्मेलनों (COP) का आयोजन एक ही वर्ष में हो रहा है, जिसकी शुरुआत इसी मरुस्थलीकरण सम्मेलन से हुई है।
- UNCCD COP-17: उलानबातर, मंगोलिया (भूमि और मरुस्थलीकरण).
- CBD COP-17: येरेवान, आर्मेनिया (जैव विविधता).
- UNFCCC COP-31: अंताल्या, तुर्की (जलवायु परिवर्तन)
प्रमुख एजेंडा और चर्चा के विषय :
- घोषणाओं से आगे बढ़कर काम : सम्मलेन का मुख्य संदेश यह है कि दुनिया के पास भूमि सुधार को लेकर वादे बहुत हैं, लेकिन अब फंडिंग और धरातल पर काम करने की जरूरत है.
- वैश्विक सूखा ढांचा : इससे पिछले सम्मेलन (COP-16, रियाद) में देश सूखे से निपटने के लिए किसी कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते पर सहमत नहीं हो पाए थे। COP-17 में उस मतभेद को सुलझाकर 'सूखा लचीलापन ढांचा' तैयार करने पर काम किया जा रहा है.
- चारागाह और चरवाहे : संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को 'अंतर्राष्ट्रीय चारागाह और चरवाहा वर्ष' (IYRP 2026) घोषित किया है। मंगोलिया इसका प्रणेता रहा है, इसलिए इस सम्मलेन में पशुपालक समुदायों और घास के मैदानों के अधिकारों पर विशेष जोर दिया गया है.
- सूखा लचीलापन क्षमता सूचकांक (DRCI): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) इस सम्मलेन में एक नया तकनीकी टूल लॉन्च कर रहा है, जिससे देश सूखे से निपटने की अपनी क्षमता माप सकेंगे
भारत के लिए इसका विशेष महत्व :
- पहली घासभूमि मार्गदर्शिका: भारत ने इसी सम्मलेन के दौरान 17 अगस्त 2026 को देश की पहली 'घासभूमि और अन्य खुली प्राकृतिक पारिस्थितिकी मार्गदर्शिका' जारी की है, जो बंजर भूमि की औपनिवेशिक मानसिकता को बदलती है.
- भारत ने SDG लक्ष्य 15.3 के तहत 2030 तक अपनी बंजर भूमि को बहाल करने और भूमि क्षरण तटस्थता (Land Degradation Neutrality - LDN) हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- एशिया-प्रशांत समूह का प्रतिनिधित्व: भारत ने एशिया-प्रशांत देशों की ओर से बोलते हुए वैश्विक सूखा प्रबंधन निर्णयों में व्यावहारिक और संतुलित परिणाम लाने की वकालत की है
विश्व के प्रमुख घास के मैदान :
- सवाना : अफ्रीका महाद्वीप (विशेषकर पूर्वी अफ्रीका जैसे केन्या और तंजानिया)। इसे 'हाथी घास' का क्षेत्र भी कहते हैं
- लानोस: वेनेजुएला और कोलंबिया (दक्षिण अमेरिका)
- कैम्पोस : ब्राजील के पठारी भाग (दक्षिण अमेरिका)
- कटिंगा : ब्राजील का पूर्वोत्तर शुष्क क्षेत्र
- पार्कलैंड : अफ्रीका
- प्रेयरी : उत्तरी अमेरिका (USA और कनाडा)। इन्हें 'विश्व की रोटी की टोकरी' कहा जाता है।
- पम्पास : अर्जेंटीना, उरुग्वे और ब्राजील (दक्षिण अमेरिका)
- वेल्ड : दक्षिण अफ्रीका
- डाउन : ऑस्ट्रेलिया
- स्टेप्स : यूरेशिया (मध्य एशिया, रूस और पूर्वी यूरोप)
- कैंटरबरी : न्यूजीलैंड
- पुस्टाज : हंगरी (यूरोप)
- मंचूरियन : चीन और मंगोलिया
भारत के प्रमुख घास के मैदान और खुले आवास :
- बुग्याल और पयार : उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले मखमली घास के मैदान।
- मर्ग : जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय घास के मैदान (जैसे—सोनमर्ग, गुलमर्ग)
- बन्नी घास के मैदान : गुजरात के कच्छ में स्थित एशिया के सबसे बड़े और सबसे बेहतरीन उष्णकटिबंधीय घास के मैदानों में से एक।
- शोला : नीलगिरी, अन्नामलाई और पालनी पहाड़ियों (पश्चिमी घाट, दक्षिण भारत) के उच्च शिखरों पर पाए जाने वाले बौने जंगलों के साथ मिश्रित घास के मैदान
- खजियार : हिमाचल प्रदेश (इसे भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' भी कहा जाता है)
- तराई : उत्तर भारत के मैदानी भागों (UP, बिहार, पश्चिम बंगाल) में पाए जाने वाले लंबे और नम घास के मैदान
मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCCD) :
- यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य भूमि की रक्षा और उसे बहाल करना, तथा मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे से निपटना है:
- स्थापना: 1994 में
- UNCCD को रियो अर्थ समिट 1992 में अपनाया गया था
संभावित प्रश्न :
- अगस्त 2026 में UNCCD COP-17 का आयोजन कहाँ किया गया? उलानबातर, मंगोलिया
- भारत ने अपनी पहली 'घासभूमि गाइड' किस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लॉन्च की?UNCCD COP-17
- भारत की पहली घासभूमि और खुली प्राकृतिक पारिस्थितिकी गाइड में कितने इकोसिस्टम प्रकारों को वर्गीकृत किया गया है?24
- प्रसिद्ध 'बन्नी घास के मैदान' भारत के किस राज्य में स्थित हैं?गुजरात
- UNCCD का मुख्य उद्देश्य क्या है?मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करना









