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खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026

Fri 14 Aug, 2026

खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 भारत के खनन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है। यह विधेयक 2026 के मानसून सत्र के दौरान संसद द्वारा पारित किया गया। लोकसभा ने इसे 12 अगस्त 2026 को तथा राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। इस विधायी सुधार के लिए खान मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। विधेयक के माध्यम से मूल खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 [MMDR Act] में संशोधन किया गया है।

संशोधन का प्रमुख उद्देश्य खनन क्षेत्र में “निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमेयता” स्थापित करना है। इसके लिए राज्यों में खनिज संसाधनों तथा खनिज-युक्त भूमि से संबंधित कराधान एवं विनियामक व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाने का प्रयास किया गया है।

पृष्ठभूमि एवं संवैधानिक संदर्भ

  • यह संशोधन 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की 9-न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ द्वारा Mineral Area Development Authority v. SAIL मामले में दिए गए निर्णय के संदर्भ में लाया गया है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, इस निर्णय ने राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की स्वायत्त शक्ति प्रदान की थी।
  • राज्यों द्वारा अलग-अलग कर एवं शुल्क लगाए जाने की संभावना से खनन उद्योग के लिए वित्तीय अनिश्चितता उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की गई।
  • इसलिए संशोधन का उद्देश्य खनिजों से संबंधित कराधान एवं विनियमन के लिए अधिक पूर्वानुमेय और स्थिर ढाँचा तैयार करना है।

अधिनियम से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • संघ सूची, प्रविष्टि 54: खानों और खनिज विकास का विनियमन; प्रमुख खनिजों पर केंद्र सरकार का अधिकार।
  • राज्य सूची, प्रविष्टि 23: खानों और खनिज विकास का विनियमन, लेकिन संघ सूची के प्रावधानों के अधीन।
  • राज्य सूची, प्रविष्टि 49: भूमि एवं भवनों पर कर।
  • राज्य सूची, प्रविष्टि 50: खनिज अधिकारों पर कर, जो संसद द्वारा बनाए गए कानून की सीमाओं के अधीन है।

ये प्रावधान केंद्र-राज्य संबंध, संघवाद तथा प्राकृतिक संसाधनों के शासन से संबंधित प्रश्नों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

प्रमुख प्रावधान

  • राज्य कराधान पर प्रतिबंध: राज्यों को केंद्र की स्पष्ट स्वीकृति के बिना खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, उपकर या अतिरिक्त शुल्क लगाने से रोका जाएगा। निर्धारित एकरूप व्यवस्था के बाहर आने वाले कुछ पूर्ववर्ती अप्राप्त राज्य शुल्कों को भी अमान्य माना जाएगा।
  • कैप्टिव खानों में बिक्री सीमा समाप्त: कैप्टिव खानों से खनिजों की बिक्री पर मौजूदा 50% सीमा समाप्त कर दी गई है। अब कैप्टिव खनन संचालक अपनी औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद अधिशेष खनिज उत्पादन का 100% बेच सकेंगे। इससे कैप्टिव खनन गतिविधियों को अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है।
  • महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों का समावेश: मौजूदा खनन पट्टों में लिथियम, निकेल, ग्रेफाइट और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की खोज एवं निष्कर्षण को शामिल करने की सुविधा प्रदान की गई है।
  • मिनरल एक्सचेंज: विधेयक इलेक्ट्रॉनिक मिनरल एक्सचेंजों के पंजीकरण एवं विनियमन के लिए एक समर्पित तंत्र स्थापित करने का प्रावधान करता है। इसका उद्देश्य धातुओं एवं खनिजों के पारदर्शी ऑनलाइन व्यापार को बढ़ावा देना तथा खनिज बाजारों की दक्षता में सुधार करना है।

प्रमुख एवं लघु खनिज

  • संशोधन प्रमुख और लघु खनिजों के बीच अंतर को बनाए रखता है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, केंद्र सरकार कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर, तांबा और मैंगनीज जैसे प्रमुख खनिजों को विनियमित करती है, जबकि राज्य 49 लघु खनिजों, जैसे रेत, मिट्टी और बजरी, पर नियामक एवं क्रियान्वयन संबंधी अधिकार बनाए रखते हैं।
  • प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में भारत के संघीय ढाँचे को समझने के लिए यह विभाजन महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक महत्व

  • यह संशोधन राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) के उद्देश्यों के अनुरूप भी है।
  • लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं। घरेलू स्तर पर इनके अन्वेषण एवं उत्पादन को बढ़ाने से भारत को बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।

राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM)

 

  • शुभारंभ/अनुमोदन: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2025 की शुरुआत में अनुमोदित; भारत के लिए चिन्हित 30 महत्वपूर्ण खनिजों पर आधारित।
  • नोडल मंत्रालय: खान मंत्रालय।
  • लक्ष्य: 2030-31 तक भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के माध्यम से 1,200 अन्वेषण परियोजनाएँ संचालित करना।

महत्वपूर्ण खनिजों पर फोकस

  • कुल चिन्हित: भारत के लिए 30 महत्वपूर्ण खनिज।
  • प्रमुख उदाहरण: लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व (REEs), टाइटेनियम और टंगस्टन।
  • उल्लेखनीय अपवर्जन: सोना जैसे बहुमूल्य धातुओं को NCMM के अंतर्गत महत्वपूर्ण खनिजों में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उपलब्ध सामग्री के अनुसार इनमें उन्नत/हरित प्रौद्योगिकी संबंधी अनुप्रयोगों का अभाव है।

अन्य तथ्य

  • केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री: श्री जी. किशन रेड्डी।
  • केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री: श्री सतीश चंद्र दुबे।

भारत में महत्वपूर्ण खनिज एवं खनन क्षेत्र

खनिज श्रेणी प्रमुख उत्पादक राज्य महत्वपूर्ण खान/क्षेत्र
लौह अयस्क धात्विक (लौह) ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, झारखंड बैलाडीला (छत्तीसगढ़), मयूरभंज/क्योंझर (ओडिशा), नोआमुंडी (झारखंड), संदूर-होस्पेट (कर्नाटक)
कोयला ऊर्जा/ईंधन झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश झरिया एवं बोकारो (झारखंड), कोरबा (छत्तीसगढ़), तालचर (ओडिशा), सिंगरौली (मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश)
बॉक्साइट धात्विक (एल्युमिनियम) ओडिशा, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड पंचपटमाली/कोरापुट (ओडिशा), लोहरदगा (झारखंड), अमरकंटक (मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़)
मैंगनीज धात्विक (मिश्रधातु) मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा डोंगरी बुजुर्ग (महाराष्ट्र), बालाघाट एवं छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)
तांबा धात्विक (अलौह) मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड मलांजखंड (मध्य प्रदेश), खेतड़ी (राजस्थान), सिंहभूम (झारखंड)
सीसा एवं जस्ता धात्विक (अलौह) राजस्थान रामपुरा अगुचा एवं जावर खानें (राजस्थान)
सोना बहुमूल्य धातु कर्नाटक, झारखंड कोलार गोल्ड फील्ड्स एवं हट्टी (कर्नाटक), हीरा-बुद्दिनी (कर्नाटक)
हीरा बहुमूल्य रत्न मध्य प्रदेश पन्ना हीरा खानें (मध्य प्रदेश)
यूरेनियम रणनीतिक/ऊर्जा झारखंड, आंध्र प्रदेश जादूगोड़ा एवं तुरामडीह (झारखंड), तुम्मलापल्ले (आंध्र प्रदेश)
चूना पत्थर अधात्विक राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़), चित्तौड़गढ़ एवं जैसलमेर (राजस्थान), कटनी (मध्य प्रदेश)

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