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विदेशी परिसंपत्तियों के संबंध में छोटे करदाताओं की प्रकटीकरण योजना (FAST-DS) नियम, 2026

Mon 17 Aug, 2026

Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme (FAST-DS) Rules, 2026 एक महत्वपूर्ण कर-अनुपालन पहल है, जिसका उद्देश्य पात्र करदाताओं को पूर्व में घोषित न की गई कुछ विदेशी परिसंपत्तियों और आय का स्वैच्छिक रूप से प्रकटीकरण करने का सीमित अवसर प्रदान करना है। यह योजना केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा अधिसूचित की गई है और 16 अगस्त 2026 से प्रभावी हुई। इसके अंतर्गत प्रकटीकरण की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक रहेगी।

परीक्षा की दृष्टि से यह योजना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वैच्छिक कर-अनुपालन, विदेशी परिसंपत्तियों का प्रकटीकरण, कर-पारदर्शिता तथा दंडात्मक परिणामों से राहत को एक साथ जोड़ती है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से उन मामलों को संबोधित करना है, जहाँ करदाताओं ने अनजाने में या जानकारी के अभाव में विदेशों में रखी परिसंपत्तियों की घोषणा नहीं की हो, न कि जानबूझकर बड़े पैमाने पर कर चोरी की हो।

प्रमुख विशेषताएँ

पैरामीटर विवरण
नाम विदेशी परिसंपत्तियों के संबंध में छोटे करदाताओं की प्रकटीकरण योजना (FAST-DS), 2026
प्रशासनिक प्राधिकरण केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)
मंत्रालय वित्त मंत्रालय
प्रभावी तिथि 16 अगस्त 2026
अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026
प्रकृति एकमुश्त स्वैच्छिक प्रकटीकरण/अनुपालन अवसर
घोषणा फॉर्म 1 के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से
मूल्यांकन निर्धारित नियमों के अनुसार उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value—FMV)

यह योजना पात्र करदाताओं को उन कुछ विदेशी परिसंपत्तियों को नियमित करने का अवसर देती है, जिन्हें उनके आयकर रिटर्न (ITR) में घोषित नहीं किया गया था। अधिसूचित ढाँचे में विभिन्न प्रकार की विदेशी परिसंपत्तियों, जैसे प्रतिभूतियाँ, आभूषण, कलाकृतियाँ और अचल संपत्तियाँ, के उचित बाजार मूल्य (FMV) के निर्धारण की विधियाँ भी निर्धारित की गई हैं।

श्रेणियाँ और वित्तीय सीमाएँ

FAST-DS में उपलब्ध अध्ययन सामग्री के अनुसार, विदेशी परिसंपत्तियों के गैर-प्रकटीकरण को व्यापक रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

  • श्रेणी A: यह उन विदेशी परिसंपत्तियों या आय पर लागू होती है, जिन्हें भारत में कभी कर के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया था, निर्धारित मूल्य सीमा के अधीन। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, इसकी कुल परिसंपत्ति सीमा ₹1 करोड़ है। इस पर 30% कर + 30% जुर्माना, अर्थात कुल 60% प्रभावी देयता निर्धारित है।
  • श्रेणी B: यह उन विदेशी परिसंपत्तियों से संबंधित है, जिन्हें ऐसी आय से अर्जित किया गया था जिस पर पहले ही कर लगाया जा चुका था, अथवा जिन्हें व्यक्ति ने NRI रहते हुए अर्जित किया था, लेकिन बाद में ITR की विदेशी परिसंपत्ति अनुसूची में घोषित नहीं किया। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, इसकी परिसंपत्ति सीमा ₹5 करोड़ है तथा इसके लिए ₹1 लाख का शुल्क निर्धारित है, जो लागू शर्तों के अधीन होगा।
  • न्यूनतम सीमा (De-minimis) सुरक्षित प्रावधान: उपलब्ध सामग्री में ₹20 लाख से कम मूल्य वाली कुछ छोटी गैर-अचल विदेशी परिसंपत्तियों के लिए एक सुरक्षित प्रावधान का भी उल्लेख है।

परीक्षा सावधानी: विस्तृत अधिसूचित नियमों को प्रचलित संक्षिप्त सारांशों से अलग करके देखना चाहिए। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, योजना में देय राशि के लिए निर्धारित तालिकाएँ तथा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के विस्तृत नियम शामिल हैं। इसलिए किसी विशिष्ट मामले में सटीक गणना के लिए अधिसूचित नियमों को आधार बनाया जाना चाहिए।

पात्रता एवं प्रक्रिया

यह योजना विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रासंगिक है जिनके पास विदेशी बैंक खाते, विदेशी प्रतिभूतियाँ, ESOPs/RSUs अथवा विदेशी अचल संपत्ति है, लेकिन उनका उचित रूप से प्रकटीकरण नहीं किया गया था।

उपलब्ध सामग्री में निवासी, अनिवासी भारतीय (NRI) तथा Resident but Not Ordinarily Resident (RNOR) व्यक्तियों को संभावित पात्र श्रेणियों के रूप में बताया गया है, जो नियमों में निर्धारित शर्तों के अधीन होंगे।

प्रकटीकरण प्रक्रिया फॉर्म 1 के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से शुरू होती है। आवेदन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घोषणा का निपटारा किया जाता है तथा आदेश, भुगतान और अंतिम अनुपालन दस्तावेज के लिए आगे के फॉर्म का उपयोग किया जाता है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, फॉर्म 4 अंतिम प्रतिरक्षा/इम्युनिटी प्रमाण-पत्र के रूप में जारी किया जाता है।

रणनीतिक महत्व

FAST-DS स्वैच्छिक एवं प्रौद्योगिकी-आधारित कर अनुपालन की दिशा में व्यापक नीतिगत बदलाव को दर्शाता है। केवल प्रवर्तन उपायों पर निर्भर रहने के बजाय सरकार पात्र करदाताओं को पूर्व में हुई घोषणात्मक त्रुटियों को सुधारने के लिए एक निर्धारित मार्ग उपलब्ध कराती है।

यह पहल विदेशी वित्तीय सूचनाओं के अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान से भी जुड़ी है। Automatic Exchange of Information (AEOI) और Common Reporting Standard (CRS) जैसे वैश्विक कर-पारदर्शिता तंत्र कर प्राधिकरणों को विदेशों में रखी वित्तीय परिसंपत्तियों से संबंधित सूचनाएँ प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं। परिणामस्वरूप, विदेशी परिसंपत्तियों का उचित प्रकटीकरण सुनिश्चित करना करदाताओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

कानूनी एवं आर्थिक महत्व

यह योजना जानबूझकर की गई कर चोरी और अनजाने में हुए गैर-प्रकटीकरण के बीच अंतर करने का प्रयास करती है। पात्र करदाताओं द्वारा वैध घोषणा किए जाने पर, निर्धारित शर्तों के अनुपालन के अधीन, योजना दंड और अभियोजन से निर्दिष्ट राहत प्रदान करती है। इससे लंबे समय तक चलने वाले विवादों को कम करने और पूर्व में घोषित न की गई विदेशी परिसंपत्तियों को औपचारिक कर प्रणाली के दायरे में लाने में सहायता मिल सकती है।

व्यापक आर्थिक दृष्टि से यह पहल कर पारदर्शिता, स्वैच्छिक अनुपालन, कर आधार के विस्तार तथा विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों के औपचारिकीकरण को बढ़ावा दे सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • FAST-DS: विदेशी परिसंपत्तियों के संबंध में छोटे करदाताओं की प्रकटीकरण योजना
  • अधिसूचित द्वारा: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)
  • मंत्रालय: वित्त मंत्रालय
  • प्रभावी तिथि: 16 अगस्त 2026
  • अंतिम तिथि: 31 दिसंबर 2026
  • घोषणा: फॉर्म 1
  • अंतिम अनुपालन प्रमाण-पत्र: फॉर्म 4
  • मुख्य अवधारणा: पात्र विदेशी परिसंपत्तियों का स्वैच्छिक प्रकटीकरण
  • मूल्यांकन की अवधारणा: उचित बाजार मूल्य (FMV)
  • अंतरराष्ट्रीय कर-पारदर्शिता तंत्र: AEOI और CRS
  • महत्वपूर्ण कानून: आयकर अधिनियम, 1961 तथा काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियाँ) अधिनियम, 2015
  • मुख्य उद्देश्य: स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना तथा पात्र अघोषित विदेशी परिसंपत्तियों को नियमित करना।

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