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लिथियम और गैलियम की खोज के लिए समझौता

Wed 12 Aug, 2026

संदर्भ

आंध्र प्रदेश के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च–नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-NGRI) के साथ 12 अगस्त 2026 को कडप्पा बेसिन में लिथियम और गैलियम के भंडारों की खोज के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता विजयवाड़ा स्थित राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और खान मंत्री कोल्लू रवींद्र की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) क्या हैं?

महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज संसाधन हैं जिनका आर्थिक या रणनीतिक महत्व अधिक होता है, लेकिन जिनकी आपूर्ति-श्रृंखला में संभावित जोखिम मौजूद होते हैं। इनकी उपलब्धता नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

लिथियम

लिथियम एक हल्की धातु है, जो आधुनिक ऊर्जा अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका व्यापक उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में होता है:

  • रिचार्जेबल बैटरियाँ
  • इलेक्ट्रिक वाहन
  • ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ
  • सिरेमिक और काँच
  • स्नेहक (Lubricants)
  • विशेष मिश्रधातुएँ

इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण के बढ़ते उपयोग के कारण लिथियम का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।

गैलियम

गैलियम एक पोस्ट-ट्रांजिशन धातु (Post-transition metal) है, जिसका उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण उपयोग होता है। इसका उपयोग निम्नलिखित में किया जाता है:

  • सेमीकंडक्टर
  • प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED)
  • इंटीग्रेटेड सर्किट (IC)
  • सौर-आधारित प्रौद्योगिकियाँ
  • उच्च-प्रदर्शन वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

इस प्रकार, गैलियम की खोज भारत के उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए घरेलू आपूर्ति-श्रृंखला को मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

कडप्पा बेसिन में अन्वेषण

भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण मुख्य रूप से कडप्पा बेसिन के वेम्पल्ले और थुम्मलापल्ले क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।

लेख में उल्लिखित प्रारंभिक अध्ययनों के अनुसार:

  • लिथियम की सांद्रता: अधिकतम 1,000 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm)
  • गैलियम की सांद्रता: अधिकतम 250 ppm

कडप्पा बेसिन एक अवसादी बेसिन (Sedimentary Basin) है, जिसमें खनिज-युक्त भूवैज्ञानिक संरचनाएँ पाई जाती हैं। थुम्मलापल्ले क्षेत्र आंध्र प्रदेश में यूरेनियम खनिजीकरण के लिए भी जाना जाता है।

इसलिए, यह अन्वेषण आंध्र प्रदेश की खनिज क्षमता के बेहतर आकलन तथा भविष्य में संसाधन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

वित्तपोषण एवं संस्थागत ढाँचा

  • अन्वेषण परियोजना का अनुमानित बजट ₹140 करोड़ है।
  • लेख के अनुसार, पूरी परियोजना का वित्तपोषण नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (NMET) के माध्यम से किया जाएगा।
  • NMET एक वैधानिक ट्रस्ट है, जिसकी स्थापना Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 के अंतर्गत की गई है।
  • इसका व्यापक उद्देश्य देश में खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देना तथा खनिज संसाधनों की व्यवस्थित पहचान को प्रोत्साहित करना है।

इस परियोजना में CSIR-NGRI की भागीदारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि छिपे हुए खनिज भंडारों की पहचान और मूल्यांकन के लिए उन्नत भूवैज्ञानिक एवं भूभौतिकीय विशेषज्ञता आवश्यक होती है।

कौशल विकास एवं खनन प्रौद्योगिकी

इसी दिन आंध्र प्रदेश सरकार ने खनन क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास और कौशल संवर्धन के लिए IIT (ISM) धनबाद–TEXMiN के साथ एक अन्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

इस साझेदारी के तहत आंध्र प्रदेश में Centre of Excellence for Mining (खनन उत्कृष्टता केंद्र) स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।

इससे एक व्यापक ढाँचा विकसित होता है:

खनिज अन्वेषण → वैज्ञानिक मूल्यांकन → प्रौद्योगिकी विकास → कुशल मानव संसाधन → संसाधनों का उपयोग

इस प्रकार का एकीकृत दृष्टिकोण राज्य के खनन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकता है और आधुनिक अन्वेषण एवं खनन प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सहायता कर सकता है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

  • यह अन्वेषण समझौता केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी है, क्योंकि भारत आयातित महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता से उत्पन्न जोखिमों को कम करने का प्रयास कर रहा है।
  • लिथियम ऊर्जा संक्रमण, विशेषकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी भंडारण के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि गैलियम सेमीकंडक्टर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

घरेलू अन्वेषण निम्नलिखित में योगदान दे सकता है:

  1. महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा।
  2. आयात पर अत्यधिक निर्भरता में कमी।
  3. घरेलू बैटरी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का विकास।
  4. भारत की रणनीतिक एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करना।
  5. खनिज-आधारित उद्योगों के लिए नए अवसरों का सृजन।
  6. अन्वेषण एवं खनन क्षेत्र में कुशल रोजगार का सृजन।
  7. उन्नत भूवैज्ञानिक अनुसंधान में भारतीय संस्थानों की भागीदारी बढ़ाना।

चुनौतियाँ

खनिज की उपस्थिति की खोज का अर्थ यह नहीं है कि उसका आर्थिक रूप से व्यवहार्य खनन भी संभव होगा। इसके लिए आगे के अन्वेषण के माध्यम से भंडार के आकार, ग्रेड, निरंतरता और आर्थिक व्यवहार्यता का निर्धारण आवश्यक होगा।

सरकार को खनिज निष्कर्षण के साथ निम्नलिखित पहलुओं के बीच संतुलन स्थापित करना होगा:

  • पर्यावरण संरक्षण
  • जल संसाधन प्रबंधन
  • भूमि उपयोग संबंधी चिंताएँ
  • सतत खनन पद्धतियाँ
  • स्थानीय समुदायों के हित
  • खनन क्षेत्रों का पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन

अतः खनिज अन्वेषण के बाद वैज्ञानिक संसाधन मूल्यांकन और पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आगे की राह

  • आंध्र प्रदेश की यह पहल महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण में सरकारी संस्थानों, वैज्ञानिक संगठनों और विशेषीकृत शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय के महत्व को दर्शाती है।
  • भारत को लिथियम, गैलियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के व्यवस्थित अन्वेषण का विस्तार करना चाहिए।
  • घरेलू प्रसंस्करण एवं शोधन क्षमता विकसित करने, खनिजों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय खनिज साझेदारियों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
  • प्रस्तावित Centre of Excellence for Mining अनुसंधान, प्रौद्योगिकी अपनाने और मानव संसाधन विकास को और बढ़ावा दे सकता है।

भारत में प्रमुख खनिज/महत्वपूर्ण खनिज एवं उनके प्रमुख क्षेत्र

खनिज प्रमुख उपयोग / रणनीतिक महत्व भारत में प्रमुख स्थल/क्षेत्र राज्य/केंद्रशासित प्रदेश
लिथियम EV बैटरियाँ, रिचार्जेबल बैटरियाँ, ऊर्जा भंडारण रियासी जम्मू एवं कश्मीर
लिथियम बैटरियाँ एवं ऊर्जा भंडारण वेम्पल्ले एवं थुम्मलापल्ले, कडप्पा बेसिन आंध्र प्रदेश
लिथियम महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण मांड्या कर्नाटक
गैलियम सेमीकंडक्टर, LED, इंटीग्रेटेड सर्किट, सौर प्रौद्योगिकी कडप्पा बेसिन – वेम्पल्ले एवं थुम्मलापल्ले आंध्र प्रदेश
गैलियम सेमीकंडक्टर संबंधी अनुप्रयोग मुख्यतः बॉक्साइट/जिंक अयस्कों से सह-उत्पाद के रूप में; अन्वेषण जारी अनेक क्षेत्र
दुर्लभ मृदा तत्व (REEs) इलेक्ट्रॉनिक्स, चुंबक, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा मोनाजाइट-युक्त तटीय बालू केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश
दुर्लभ मृदा तत्व (REEs) रणनीतिक एवं उच्च-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग IREL के खनिज-बालू क्षेत्र केरल, ओडिशा, तमिलनाडु
कोबाल्ट लिथियम-आयन बैटरियाँ, सुपरएलॉय निकेल-कोबाल्ट युक्त क्षेत्र झारखंड, ओडिशा एवं अन्य अन्वेषित क्षेत्र
निकेल स्टेनलेस स्टील, बैटरियाँ, सुपरएलॉय सुकिंदा घाटी ओडिशा
ग्रेफाइट बैटरियाँ, स्नेहक, रिफ्रैक्टरी अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, झारखंड अनेक राज्य
तांबा विद्युत उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा खेतड़ी राजस्थान
तांबा विद्युत एवं औद्योगिक उपयोग सिंहभूम कॉपर बेल्ट झारखंड
बॉक्साइट एल्युमिनियम उत्पादन कोरापुट एवं कालाहांडी ओडिशा
बॉक्साइट एल्युमिनियम एवं एयरोस्पेस उद्योग कटनी क्षेत्र एवं अन्य भंडार मध्य प्रदेश
यूरेनियम परमाणु ऊर्जा जादूगोड़ा झारखंड
यूरेनियम परमाणु ईंधन थुम्मलापल्ले आंध्र प्रदेश
टाइटेनियम एयरोस्पेस, पिगमेंट, उन्नत सामग्री तटीय बीच-सैंड भंडार केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश
जिरकोनियम परमाणु रिएक्टर, सिरेमिक, उन्नत सामग्री तटीय खनिज-बालू केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश
क्रोमियम स्टेनलेस स्टील, मिश्रधातु, रिफ्रैक्टरी सामग्री सुकिंदा घाटी ओडिशा
मैंगनीज इस्पात उत्पादन, बैटरियाँ बालाघाट मध्य प्रदेश
मैंगनीज इस्पात एवं मिश्रधातु उत्पादन नागपुर–भंडारा बेल्ट महाराष्ट्र
जिंक गैल्वनाइजेशन, मिश्रधातु, बैटरियाँ रामपुरा अगूचा राजस्थान
सीसा (Lead) बैटरियाँ, विकिरण सुरक्षा, मिश्रधातु जावर राजस्थान
टिन इलेक्ट्रॉनिक्स, सोल्डर, मिश्रधातु बस्तर क्षेत्र छत्तीसगढ़
टंगस्टन रक्षा, कटिंग टूल्स, उच्च-तापमान अनुप्रयोग डेगाना राजस्थान
वैनेडियम इस्पात मिश्रधातु, ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकी वैनेडियम-युक्त भंडार/उपस्थिति अनेक क्षेत्र
पोटाश उर्वरक एवं कृषि नागौर–गंगानगर क्षेत्र राजस्थान
फॉस्फोराइट फॉस्फेट उर्वरक झामरकोटड़ा राजस्थान

 

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